वही हसरत मेरे अंदर तलक अब तरोताज़ा है ।उमर का कोई भी मंज़र उसे धुंधला न कर पाया ।।1।।कि जिस जज़्बात के बूते तलक ज़िंदा रहा हूँ मैं ।गमों का कोई भी चाबुक उसे कमतर न करपाया ।।2।।दिया है जख़्म दुनिया ने भले ही लाख इस दिल पर ।समंदर दर्द का  हस्ती डुबो अब तकContinue reading

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